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भारतीय शास्त्रीय गायन संगीत और पश्चिमी गायन संगीत में क्या अंतर है ?

जैसे कि मैं अपने अनुभव के आधार पर इसको लिखना चाहूंगा – भारतीय शास्त्रीय संगीत मेलोडी बेस्ड , Devotional एंड philshopy बेस्ड है जो कि हमें शांति और सुकून और साधना कि ओर ज्यादा खींचती है , जब कि western Vocal Harmony Based , artistic and entermaint Based ज्यादा होती , इसका यहाँ पर ये मतलब बिलकुल भी नहीं है कि western classical Vocal म्यूजिक से हमें सुकून नहीं मिलता या नहीं मिल सकता , उसी प्रकार Indian Classical Vocal Music से ये मतलब नहीं है कि वो artist और entertenment नहीं कर सकता है।

इंडियन क्लासिकल वोकल म्यूजिक में अधिकतर तबला का प्रयोग होता है , उसके बाद पखावज का प्रयोग होता है , इंडियन म्यूजिक में तीन ताल , झप-ताल , रूपक ताल , एक-ताल आदि तालो का प्रयोग होता है जिसमें अलग -अलग प्रकार से लय को दिखते हुए गाते है। भारतीय शास्त्रीय गायन संगीत में गायन के साथ तबला , तानपुरा , हारमोनियम , सारंगी का प्रयोग होता है और यह मुख्यतः एकल गायन किया जाता है।

Western Music मुख्यतः वृन्द-वादन (Group ) के रूप में गाया जाता है इसके साथ अधिकतर , पियानो, वायलिन , ड्रम , गिटार आदि instrumnets का प्रयोग करते है।

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